संसद पर 14 साल का सबसे बड़ा प्रदर्शन: CJP और युवाओं की हुंकार के आगे झुकी सरकार, नड्डा से मुलाकात नई दिल्ली: ​20 जुलाई को राजधानी दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और देश के युवाओं द्वारा किया गया ‘चलो संसद’ मार्च एक ऐतिहासिक और विशाल जन-आंदोलन में बदल गया। नीट (NEET) पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और संसद के दरवाजों तक पहुंच गए। 2012 में निर्भया कांड के बाद दिल्ली में पहली बार ऐसा अभूतपूर्व जन-आक्रोश देखने को मिला। ​इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच 12 से ज्यादा जगहों पर झड़पें हुईं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज में सैकड़ों लोग घायल हुए। ​प्रदर्शन और घटनाक्रम के मुख्य बिंदु: ​संसद के दरवाजे बंद: सोमवार को दोपहर 9 बजे से शाम 4 बजे तक नई दिल्ली जिले में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। प्रदर्शनकारी संसद के रेल भवन वाले दरवाजे तक पहुंच गए, जिसके बाद संसद के सभी दरवाजे लॉक कर दिए गए और करीब एक घंटे तक प्रवेश व निकास पूरी तरह बंद रहा। ​सुरक्षा बलों पर असर व चोटें: दिल्ली पुलिस के मुताबिक, झड़पों में 5 आईपीएस अफसरों समेत 118 पुलिसकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए। CJP के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने दावा किया कि 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी अस्पतालों में भर्ती हैं और 1000 से ज्यादा को चोटें आई हैं। सुरक्षा बलों की 15-20 गाड़ियों में भी तोड़फोड़ हुई। ​देशभर से मिला समर्थन: दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, बंगाल, गुजरात और केरल समेत कई राज्यों से सीजेपी के समर्थन में युवा दिल्ली पहुंचे थे। ​संसद में हंगामा और स्थगन: ​मानसून सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में नीट पेपर लीक, जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और राम मंदिर में दान चोरी के आरोपों को लेकर विपक्ष ने भारी हंगामा किया। इसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही को 6-6 बार स्थगित करना पड़ा। ​सरकार से बातचीत और नड्डा से मुलाकात: ​प्रदर्शन के भारी दबाव के बीच पहली बार सरकार (भाजपा) सीजेपी प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए तैयार हुई: ​सुबह 6 बजे कॉल: नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त ने सुबह 6 बजे सीजेपी से संपर्क किया और बातचीत का प्रस्ताव दिया। ​11:45 बजे जेपी नड्डा से मुलाकात: सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रंका ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। बैठक के बाद सीजेपी ने कहा कि बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। ​प्रमुख मांगें: ​सोनम वांगचुक को अस्पताल से रिहा किया जाए। ​शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। ​आत्महत्या करने वाले नीट के पीड़ित छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिले। ​सोनम वांगचुक का अनशन (24वां दिन): ​अनशन के 24वें दिन अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने चिट्ठी लिखकर अपना अनशन जारी रखने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि “प्रदर्शनकारी युवाओं पर बर्बरता को देखते हुए अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिलती।” ​किसान संगठनों का समर्थन और नेता घायल: ​युवाओं के इस आंदोलन में किसान संगठनों ने भी खुलकर समर्थन दिया। इसी क्रम में युवाओं के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे भारतीय किसान यूनियन जन मंच के हरियाणा प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. शुभेंद्र सिंह पंवार भी पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग और लाठीचार्ज के दौरान चोटिल हो गए।